गेहूं की दूसरी सिंचाई और खाद प्रबंधन: अधिक फुटाव और पैदावार के लिए खास टिप्स. गेहूं की फसल में दूसरी सिंचाई का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यही वह समय है जब पौधे में टिलरिंग (फुटाव) की प्रक्रिया चल रही होती है। सामान्य तौर पर, पहली सिंचाई के लगभग 20 दिनों बाद दूसरी सिंचाई करनी चाहिए। हालांकि, मिट्टी के प्रकार के आधार पर इस समय में बदलाव किया जा सकता है। अगर मिट्टी हल्की या रेतीली है, तो 15-18 दिनों में पानी देना बेहतर है, जबकि भारी मिट्टी में यह अंतराल 25-30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
फसल में पीलापन दूर करने और अधिक कल्ले निकालने के लिए यह खाद डालने का आखिरी मौका होता है। गेहूं में फुटाव का समय लगभग 55 दिनों तक ही रहता है, इसके बाद नई टहनियां नहीं निकलतीं। इसलिए, दूसरे पानी के साथ यूरिया का उपयोग अवश्य करें। यदि आपने बुवाई के समय जिंक या सल्फर का उपयोग नहीं किया है, तो इस समय जिंक सल्फेट (33% वाला 5 किलो या 21% वाला 8 किलो प्रति एकड़) डालना बहुत फायदेमंद रहता है।
यदि आपकी फसल कमजोर दिख रही है या विकास धीमा है, तो मैग्नीशियम सल्फेट का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही, बेहतर बढ़वार के लिए सागरिका या बायोविटा जैसे सीवीड एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल भी यूरिया के साथ मिलाकर किया जा सकता है। ये खादें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं और पौधों को तनाव से बचाती हैं। ध्यान रहे कि यूरिया के अलावा अन्य खादें पानी के संपर्क में आने पर ही बेहतर परिणाम देती हैं, इसलिए इन्हें सिंचाई के समय ही डालें।
खाद डालने के तरीके पर विशेष ध्यान दें। यदि आप फव्वारा सिंचाई (Sprinkler) का उपयोग कर रहे हैं, तो खाद छिड़कने के तुरंत बाद पानी चलाएं। माइकोराइजा जैसे जैविक खादों का उपयोग करते समय उन्हें यूरिया या सल्फर के साथ सीधे मिलाने से बचें, क्योंकि इससे उनके बैक्टीरिया पर बुरा असर पड़ता है। माइकोराइजा को गोबर की खाद या मिट्टी में मिलाकर डालना सबसे प्रभावी तरीका है।
सही समय पर पानी और संतुलित खादों का यह तालमेल न केवल गेहूं की फसल को हरा-भरा बनाएगा, बल्कि प्रति एकड़ पैदावार में भी शानदार वृद्धि करेगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी मिट्टी की जांच के आधार पर ही खादों की मात्रा तय करें ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।